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लाल बहादुर शास्‍त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे देश के पहले प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू जी की मृत्‍यु के बाद वे देश दूसरे प्रधानमंत्री नियुक्‍त हुऐ थे तो आइये जानत हैं लाल बहादुर शास्‍त्री जी का जीवन परिचय - Biography of Lal Bahadur Shastri

Biography of Lal Bahadur Shastri

लाल बहादुर शास्‍त्री जी का जीवन परिचय - Biography of Lal Bahadur Shastri

प्रारम्भिक जीवन 

लाल बहादुर शास्‍त्री का जन्‍म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था इनके पिता का नाम  शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माता जी का नाम रामदुलारी देवी था इनके पिता पेशे से एक अध्‍यापक थे शास्‍त्री जी जब छोटे थे तो पिता का देहान्‍त हो गया और इनकी माता इन्‍हें लेकर इनके नाना के घर मिर्जापुर आ गई शास्‍त्री जी अपने घर में सबसे छोटे थे इसलिए इन्‍हें नन्‍हें कहकर पुकारा जाता था

शिक्षा और विवाह 

 इनकी प्राथमिक शिक्षा मिर्जापुर से पूरी हुई और इन्‍होंने आगे की शिक्षा में सस्‍कृत भाषा से स्‍नातक की डिग्री प्राप्‍त की और इसके बाद इन्‍होंने काशी विद्या पीठ से शास्‍त्री की उपाधि प्राप्‍त की और तभी से इन्‍होंने अपने नाम के आगे शास्‍त्री शब्‍द को जोड दिया शास्‍त्री जी का विवाह वर्ष 1928 में ललिता देवी से हुआ

राजनीतिक जीवन 

इसके बाद शास्‍त्री जी ने 1930 में गांधी जी के साथ नमक सत्याग्रह में भी भाग लिया था जिसकी वजह से उन्हें ढाई साल तक जेल में रहना पड़ा था जब गोविन्द वल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बने तो उन्होंने लाल बहादुर को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया वर्ष 1947 में शास्त्री जी पंत मंत्रिमंडल में पुलिस और परिवहन मंत्री बनाये गये तभी शास्‍त्री जी ने पहली बार बसों में महिला कंडक्‍टरों की नियुक्ति की थी पुलिस मंत्री रहते हुऐ शास्‍त्री जी ने भीड को काबू करने के लिए लाठी की जगह पानी बौछार की शुरूआत की थी इसके बाद शास्‍त्री जी इलाहाबाद गये और वहॉ इनकी मुलाकात जवाहर लाल नेहरू जी से हुई नेहरू जी इनसे बहुत प्रभावित हुऐ और वर्ष 1951 में अखिल भारतीय राष्‍ट्रीय कॉग्रेस का महासचिव नियुक्‍त किया गया और 1952 में जवाहर लाल नेहरू ने लाल बहादुर शास्त्री को केंद्रीय मंत्रिमंडल में रेलवे और परिवहन मंत्री के रूप में नियुक्त किया शास्‍त्री जी ने रेलवे में थर्ड क्‍लास की शुरूआत की थी उन्‍होंनं फर्स्ट क्लास और थर्ड क्लास के किराया में काफी अंतर कर दिया था इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़ी राहत मिली थी लाल बहादुर शास्‍त्री जी को नेहरू जी की मृत्‍यु के बाद 9 जून 1964 को भारत का दूसरा प्रधानमंत्री नियुक्‍त किया गया था “जय जवान-जय किसान” का नारा शास्त्री जी ने दिया था

मृत्‍यु 

ताशकंद समझौते के बाद दिल का दौरा पड़ने से 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में शास्त्री जी का निधन हो गया शास्‍त्री जी को वर्ष 1966 में भारत के सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था

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