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मिट्टी (soil)  किसी भी देश के कृषि का मुख्‍य आधार होती है भारत में कई प्रकार की मिट्टीयॉ पाई जाती हैं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने मिट्टी को 8 वर्गों में बॉटा है मिट्टी के अध्‍ययन को मृदा विज्ञान (soil Science) कहा जाता है आइये जानते हैं भारत की मिट्टीयॉ और उनके प्रकार - Types of soil of india in Hindi

भारत की मिट्टियों के प्रकार - Types of soil of India

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1. जलोढ़ मिट्टी या दोमट मिट्टी (Alluvium Soil)

यह भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण मिट्टी है यह मिट्टी भारत में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाती है जलोढ मिट्टी में पोटाश की मात्रा सबसे अधिक होती है इस‍लिए जलोढ मिट्टी में सबसे कम उवर्रक की आवश्‍कता होती है यह भारत के उत्‍तरी मैदानोंं में पाई जाती है गंगा नदी में जलोढ मिट्टी भूमि की सतह से 600 मी की गहराई तक पाई जाती है जलोढ मिट्टी भारत के समस्त स्‍थल के 24 प्रतिशत भाग पर है

2. काली मिट्टी (Black Soil)


काली मिट्टी का निर्माण लावा के प्रवाह के कारण होता है रेगुर मिट्टी काली मिट्टी का दूसरा नाम है भारत में यह लगभग 5 लाख वर्ग-किमी. में फैली है इस मिट्टी को दक्कन ट्रॅप से बनी मिट्टी भी कहते हैं यानि बैसाल्‍ट चट्टानों के विखंडन से काली मिट्टी का निर्माण होता है यह मिट्टी जैवीय पदार्थों से भरपूर होती है, काली मिट्टी कार्बनिक पदार्थों की अधिकता होती है कृषि के लिए बहुत उपयोगी होती है इस मिट्टी में कृषि के लिए सिचाई की आवश्‍यकता नही होती है यह बहुत ही उपजाऊ है और कपास की उपज के लिए प्रसिद्ध है इसलिए इसे कपासवाली काली मिट्टी कहते हैं।

3. लाल एवंं पीली मिट्टी (Red and Yellow soil)

भारत में दूसरा सर्वाधिक क्षेत्र 18% में पाया जाने वाला मिट्टी लाल मिट्टी है इस मिट्टी का निर्माण ग्रेनाइट और नाइस चट्टानों के द्वारा होता है लाल मिट्टी लोहे के ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण यह लाल दिखाई देती है लाल मिट्टी दक्षिण भारत में या पठारी भारत के सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाती है लाल मिट्टी पठारी भारत के कम वर्षा वाले क्षेत्रों की मिट्टी हैं यह मिट्टी मोट अनाजों के लिए उपयोगी मानी जाती है

4. लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)


यह मिट्टी रासायनिक क्रियाओं तथा चट्टानो के टूट-फूट द्वारा शुष्क मौसम में बनती है इस मिट्टी को मुखरैला मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है ईट बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी लैटेराइट मिट्टी है इस मिट्टी में लोहे और एल्‍युमीनियम के कण पाये जाते हैं चाय की खेती के लिए के लिए यह सबसे उपयोगी मिट्टी है यह मिट्टी सूख जाने पर कठोर एवं गीली होने पर लिपलिपी हो जाती है 

5. लवणीय क्षारयुक्त मिट्टी (Saline and Alkaline Soil)


क्षारयुक्त मिट्टी अधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में यह मिट्टी पाई जाती है इस थूर, ऊसर, कल्लहड़, राकड़, रे और चोपन के नामों से भी जाना जाता है यह मिट्टी भूमि की निचली परतों से क्षार या लवण वाष्पीकरण द्वारा उपरी परतों तक आ जाती है 

6. मरुस्थलीय मिट्टी या रेतीय मिट्टी  (Desert soil)


यह मिट्टी राजस्थान तथा राजस्थान के आसपास के राज्यों में पाई जाती है इस मिट्टी में सिंचाई के सहारे गेंहू, गन्ना, कपास, ज्वार, बाजरा उगाये जाते हैं 

7. नवीन जलोढ़ मिट्टी (New alluvial soil)


यह मिट्टी उत्तर के विस्तृत मैदान तथा प्रायद्वीपीय भारत के तटीय मैदानों में मिलती है इसे कॉप मिट्टी और पीट एवं दलदली मिट्टी भी कहा जाता है यह मिट्टी सतलज, गंगा, यमुना, घाघरा,गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाई जाती है यह मिट्टी सतलज, गंगा, यमुना, घाघरा,गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाई जाती है यह मिट्टी दलदली एवं नमकीन प्रकृति की होती है

8. पर्वतीय मिट्टी (Mountain soil)


पर्वतीय मिट्टी में कंकड़ एवं पत्थर की मात्रा अधिक होती है पर्वतीय मिट्टी में भी पोटाश, फास्फोरस एवं चूने की कमी होती है पहाड़ी क्षेत्र में खास करके बागबानी कृषि होती है पहाड़ी क्षेत्र में ही झूम खेती होती है। झूम खेती सबसे ज्यादा नागलैंड में की जाती है। पर्वतीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा गरम मसाला की खेती की जाती है

महत्‍वपूर्ण तथ्‍य 

  1. मृदा अपरदन को कैसे रोका जा सकता है - वन रोपण द्वारा 
  2. भारत के किस राज्‍य में अंतर्देशीय लवणीय आर्द्र भूमि है - राजस्‍थान में 
  3. गंगा में जलोढ मिट्टी भूमि की सतह से कितने नीचे तक पायी जाती है - 600 मीटर तक 
  4. धान की खेती के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्‍त होती है - दोमट मिट्टी
  5. किस अयस्‍क के कारण लाल मिट्टी का रंग लाल होता है - लौह ऑक्‍साइड (iron oxide)


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