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ब्लैक होल (black hole) ? वैसे तो हमारा ब्रह्मांड ढेर सारे रहस्यों से भरा हुआ है और अगर सही बात की जाए तो अभी तक अपने सौरमंडल को ही ठीक से नहीं समझ पाए हैं और ऐसे में अगर बात करें ब्लैक होल की तो यह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य है इस पोस्ट में हम जाने वाले हैं ब्लैक होल क्या होता है ब्लैक होल का सिद्धांत क्या है और ब्लैक होल की खोज किसने की थी 

ब्लैक होल क्या है - What is black hole in Hindi

ब्लैक होल क्या है - What is black hole in Hindi

ब्लैक होल क्या होता है 

तो सबसे पहले जानते हैं ब्लैक होल क्या होता है असल में ब्लैक होल ब्रह्मांड में एक ऐसी जगह होती है जहां पर भौतिक विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल बहुत शक्तिशाली होता है ऐसा कहा जाता है कि ब्लैक होल प्रकाश को भी अपने अंदर समा लेता है इसके गुरुत्वाकर्षण बल से कोई भी नहीं बच सकता है और जब यह प्रकाश को भी अपने अंदर समा लेता है तो यह देखने में एक काले छेद के समान होता है इसलिए इसे काले छेद  या ब्लैक होल कहते हैं आइए जानते हैं ब्लैक होल कैसे बनता है

ब्लैक होल कैसे बनता है 

कोई भी तारा यानी हमारा सूर्य भी नाभिकीय संलयन से निकलती हुई प्रचंड ऊष्मा के कारण तारे का गुरुत्वाकर्षण संतुलन में रहता है और लेकिन सभी तारों की एक उम्र होती है जब धीरे धीरे तारों में मौजूद हाइड्रोजन खत्म होने लगती है तो वह धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है ठंडा होने के कारण सौर द्रव्यमान* (solar mass) से लगभग 1.4 गुना द्रव्यमान वाले तारे अपने ही गुरुत्वाकर्षण को नहीं संभाल पाते और इनमें संकुचन पैदा होता है और ऐसी स्थिति में तारी में एक भयंकर विस्फोट होता है इस विस्फोट को हम सुपरनोवा या महानोवा कहते हैं विस्फोट के बाद यदि उस बारे में कोई गलत वाला व शेष बचता है तो वह न्यूट्रॉन तारा बन जाता है 
खगोलविज्ञान में सौर द्रव्यमान (solar mass) ( ) द्रव्यमान की मानक इकाई है, जिसका मान १.९८८९२ X १०३० कि. ग्रा. है। इसका उपयोग तारों और आकाशगंगाओं के द्रव्यमान को इंगित करने के लिए किया जाता है।
ऐसी स्थिति में इस में अपार गुरुत्वीयबल पैदा होता है और तारा संकुचित होने लगता है यह संकुचन इतना जबरदस्त होता है कि यहां पर स्पेस और टाइम भी बदलनी लगते हैं और यह कि स्थिति ऐसी आती है कि इस तारे में स्पेस और टाइम का अस्तित्व भी समा जाता है और यह अदृश्य हो जाता है यह सारी चीजों को अपनी ओर खींचने लगता है इसमें अपार गुरुत्वाकर्षण बल पैदा हो जाता है यहां तक कि प्रकाश भी इस में समा जाता है और यही अदृश्य पिंड ब्लैक होल कहलाते हैं

अगर सीधी भाषा में कहा जाए तो जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो खुद के ही भीतर से मरने लगता है और इस स्थिति पर पहुंच जाता है कि एक बहुत विशाल ब्लैक होल बन जाता है जिसमें प्रकाश और समय जैसी चीजें भी कोई मायने नहीं रखती हैं

ब्लैक होल की खोज

ब्लैक होल के बारे में सबसे पहले अपने विचार प्रोफेसर जॉन मैं खेलने 1783 में दिए थे प्रोफेसर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के अध्यापक थे और 1796 में उन्होंने अपनी किताब द सिस्टम ऑफ वर्ल्ड में ब्लैक होल के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी और दुनिया के सामने आने वाला पहला पहला Black Hole Cygnus X1 था जिसकी पुष्टि 1972 में की गई थी 

ब्लैक होल के बारे में रोचक तथ्य

  • ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि इसके बाहर प्रकाश का भी जाना मुमकिन नहीं होता है
  • ब्लैक होल के अंदर समय बहुत धीमा होता है इसकी वजह इसका शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण और अपार घनत्व होता है जिसकी वजह से इसके अंदर समय का प्रभाव बहुत कम हो जाता है या तो समय का कोई अस्तित्व ही नहीं रहता है
  • हमारे पृथ्वी के सबसे नजदीकी ब्लैक होल की दूरी लगभग 1600 प्रकाश वर्ष है लेकिन इससे हमारी पृथ्वी के सौरमंडल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है क्योंकि उसका गुरुत्वीय प्रभाव हमारी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है
  • हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक विशालकाय ब्लैक होल है जो हमारे सूर्य से 30 लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर है और करीब सूर्य से 3 लाख गुना बड़ा है
  • अगर कोई वस्तु ब्लैक होल के अंदर गिर जाती है वह ब्लैक होल के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल से तुरंत ही नष्ट हो जाएगी


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